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ग्रामीणों को साक्षर करने वाली “PMGDISHA” चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट ,सिर्फ यूपी में 300 करोड़ के घोटाले की आशंका  

आपको बता दे "pmgdisha" में प्रत्येक पात्र ग्रामीण को साक्षर करने के लिए 300 रुपए सीएससी सेंटर को दिया जाता है, जिसमे रजिस्ट्रेशन, प्रशिक्षण और परीक्षा शामिल होती है लेकिन यहीं 300 रुपए इस योजना को खोखला करने का सबसे बड़ा कारण बन गया ,दिशा के आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में 6 करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके है

ग्रामीणों को डिजिटल ट्रेनिंग देने के नाम पर लिए गए खजाने से करोड़ों, फिर भी नही दी गई कोई ट्रेनिंग ।

  • अधिकारियो के संरक्षण में कई वर्षो से लगातार हो रहा स्कैम ,योजनाओं की मॉनिटरिंग के नाम पर की गई सिर्फ खानापूर्ति ।
  • “PMGDISHA” देश भर में हजारों करोड़ का छू सकता है आंकड़ा, CSC सेंटर को ढाल बना लगाया गया प्रधानमंत्री की योजना को पलीता ।
  • साक्षरता अभियान की आड़ में 2000 करोड़ से ज्यादा का स्कैम पूरे देश में होने की आशंका है ।

PMGDISHA SCAM .देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन महिलाओं पुरुषो और बच्चो के लिए जो डिजिटल तौर पर साक्षर नही थे ,उन्हे ये सब सिखाने का अनोखा सपना देखा था , और उसके लिए कार्ययोजना बनाई गई देश भर से करोड़ों ऐसे लोगो को साक्षर करने के लिए “PMGDISHA”के रूप में इस योजना को सड़क पर कई वर्ष पहले उतार दिया गया था , सब ठीक चल रहा था लोगो को सिखाने के बेहतरीन आंकड़े सामने बताए जा रहे थे ऐसा लगा मानो मोदी जी का सपना साकार होने को है ।

लेकिन जब इस देश भर में चलाई जा रही योजना की जमीनी पड़ताल  यूपी के कानपुर शहर के बिधनू ब्लॉक में आने वाले गांव उदयपुर से सुरु की तब जो आंकड़े सामने आए वो चौकाने वाले थे । बिधनू ब्लॉक के कई गांवो में हाल ही में “PMGDISHA” के कैंप लगे थे इसपर जब हमारे रिपोर्टर द्वारा ग्रामीणों से ट्रेनिंग मिलने की बात पूछी गई तब जो बताया गया वो आप भी सुनिए ।अब ये सब जानने समझने के बाद दिमाग में जो पहली बात आती है वो ये की अगर प्रशिक्षण दिया ही नहीं गया तो इस “PMGDISHA” की सफलता के आंकड़े कैसे बताए जा रहे है , जब इसकी थोड़ी सी तफसीस की गई वैसे ही सारा मामला सामने आ गया ।

आपको बता दे “pmgdisha” में प्रत्येक पात्र ग्रामीण को साक्षर करने के लिए 300 रुपए सीएससी सेंटर को दिया जाता है, जिसमे रजिस्ट्रेशन, प्रशिक्षण और परीक्षा शामिल होती है लेकिन यहीं 300 रुपए इस योजना को खोखला करने का सबसे बड़ा कारण बन गया ,दिशा के आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में 6 करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके है , तो वही 5 करोड़ से ज्यादा को प्रशिक्षण दिया जा चुका है , केवल पूरे यूपी में एक करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन करवाए गए है , जिसमे प्रशिक्षण के नाम पर जमकर घोटाला किए जाने की पूरी आशंका है ।

महज 300 रुपए बचाने के लिए किसी भी तरह की ट्रेनिंग नही दी गई , परीक्षा में फर्जीवाड़ा किया गया ,ना आजतक सर्टिफिकेट नही दिए गए । प्रदेश के तमाम जिलों समेत कानपुर सदर/आउटर में सीएससी सेंटरो में ये सब धड़ल्ले से सिर्फ इसलिए होता रहा क्योंकि मॉनिटरिंग कमेटी को जमकर पैसा खिलाया जाता रहा, सीएससी हेड से लेकर प्रदेश के नोडल अफसर तक 300 रुपए से एक हिस्सा पहुंचाया जाता है ।

उत्तरप्रदेश में भारत सरकार की अंडरटेकिंग कंपनी ( Up Electronics Corporation Ltd ) सीधे तौर पर इस फर्जीवाड़े में संलिप्त है । उत्तरप्रदेश में “PMGDISHA” के क्रियान्वयन , मॉनिटरिंग की सारी जिम्मेदारी इसी कंपनी के कंधो पर है , इसलिए जाहिर है करोड़ों के स्कैम की जिम्मेदारी भी इसी कंपनी की बनती है ।

“जिले में इस तरह की गड़बड़ी की शिकायत मिली है और शिकायतो के आधार पर बीडीओ और डीपीआरओ की टीमों का गठन किया जा रहा ,जो भी दोषी होगा सख्त कार्यवाही की जायेगी”

सीडीओ कानपुर 

Gaurav Kushwaha

Founder Editor .Prime Today News . Seniour Member . Aira Press Club. Author. Anchor. Special Focus on Crime , Politics & Scams ।

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